रीवा के संजय गांधी अस्पताल के शव वाहन का कथित दुरुपयोग कर चोरी की बकरियां सीधी ले जाने का मामला सामने आया। पुलिस ने वाहन चालक समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर बकरियां बरामद कीं।
प्रदेश की नि:शुल्क शव वाहन सेवा से हजारों परिवारों को राहत मिली है, लेकिन रीवा में 9 महीनों में 1,129 मौतों के आंकड़े ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की कार्यप्रणाली और इलाज व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सीधी नगर पालिका ने गरीब परिवारों के लिए मुफ्त शव वाहन सुविधा शुरू करने का निर्णय लिया। अब अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को भटकना नहीं पड़ेगा, साथ ही अन्य सहयोग भी उपलब्ध कराया जाएगा।
रीवा और मऊगंज में अगस्त महीने में 90 मृतकों के शव नि:शुल्क शव वाहन से घरों तक पहुँचाए गए। सरकार ने 108 एम्बुलेंस सेवा को मरीजों की जान बचाने के साथ ही अब शव ढोने की जिम्मेदारी भी दे दी है। यह सेवा नि:शुल्क है लेकिन इसमें कई खामियाँ हैं, जैसे-शव वाहन जिला सीमा पार नहीं कर सकता।
रीवा जिले के मऊगंज अस्पताल में एक 16 वर्षीय छात्रा को समय पर इलाज नहीं मिला, जिससे उसकी मृत्यु हो गई। सिस्टम की लापरवाही यहीं नहीं रुकी—पोस्टमार्टम में देरी, शव वाहन के लिए पैसे की मांग और लोडिंग वाहन में शव की विदाई ने मानवता को शर्मसार कर दिया। यह घटना प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं और संवेदनहीन तंत्र पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े करती है।

















